मनपा की घंटागाड़ियां या 'ध्वनि आतंक' का हथियार? जनता का चैन छीना, अब समाजवादी पार्टी ने छेड़ी निर्णायक जंग!
छत्रपति संभाजीनगर, १७ जुलाई | (प्रतिनिधि) : शहर को स्वच्छ बनाने के नाम पर छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका अब नागरिकों की मानसिक शांति छीनने का काम कर रही है। हर गली-मोहल्ले में दौड़ रही घंटागाड़ियां कचरा कम और 'ध्वनि आतंक' अधिक फैला रही हैं। कानफोड़ू आवाज में दिनभर एक ही गीत बजाकर हजारों नागरिकों को मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी ने मनपा प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि यह "शोरगुल की गुंडागर्दी" तत्काल बंद नहीं हुई तो अधिकारियों के विरुद्ध पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे और शहरभर में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को महानगरपालिका आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान का स्वागत है, लेकिन जनता की शांति की कीमत पर नहीं। नागरिकों को कचरा देने की सूचना देना एक बात है, लेकिन एक ही गीत को अत्यधिक तेज आवाज में बार-बार बजाकर पूरे शहर को परेशान करना प्रशासन की असंवेदनशीलता और तानाशाही मानसिकता का परिचायक है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जब आम नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाता है, तब वही नियम महानगरपालिका पर क्यों लागू नहीं होते? क्या सरकारी विभागों को कानून तोड़ने का विशेष अधिकार दे दिया गया है?
ज्ञापन में कहा गया है कि इस कानफोड़ू शोर से वरिष्ठ नागरिक, बीमार व्यक्ति, छोटे बच्चे, परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थी और घर से काम करने वाले कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सुबह से शाम तक एक ही गीत की पुनरावृत्ति लोगों के लिए सूचना नहीं बल्कि मानसिक उत्पीड़न बन चुकी है। शहर के अनेक इलाकों से नागरिकों ने इस संबंध में तीव्र नाराजगी व्यक्त की है।
समाजवादी पार्टी ने मनपा प्रशासन को सुझाव दिया कि तेज आवाज में फिल्मी गीत बजाने के बजाय कम ध्वनि में छोटे-छोटे सार्वजनिक संदेश प्रसारित किए जाएं, जैसे – "कृपया अपना घरेलू कचरा घंटागाड़ी में दें" अथवा "घंटागाड़ी आपके क्षेत्र में पहुंच चुकी है।" इससे उद्देश्य भी पूरा होगा और नागरिकों को अनावश्यक कष्ट भी नहीं होगा।
पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मनपा प्रशासन ने तुरंत ध्वनि व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो संबंधित अधिकारियों तथा जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही शहरभर में घंटागाड़ियों के विरुद्ध जनआंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी महानगरपालिका प्रशासन की होगी।
ज्ञापन पर समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र के प्रदेश महासचिव डॉ. अब्दुल रऊफ शेख, प्रदेश सचिव रियाज देशमुख, ईसा यासीन, एडवोकेट शेख गुफरान, अयूब पटेल, शाहीन पठान सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं।
"जनता को स्वच्छता चाहिए, ध्वनि आतंक नहीं! कानून जनता के लिए है तो मनपा पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।"